तीसरी सीट पर भाजपा चल सकती है बड़ा दांव

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तीसरी सीट पर भाजपा चल सकती है बड़ा दांव
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर प्रस्तावित चुनाव के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन तो भाजपा ने दो प्रत्याशी रजनीश अग्रवाल और तरुण चुघ के नाम घोषित कर दिए हैं। भाजपा ने फिलहाल तीसरी सीट पर चुनाव लड़ने या न लड़ने के बारे में कोई रणनीति उजागर नहीं की है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पार्टी तीसरी सीट पर यानी कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन के सामने किसी महिला या एसटी वर्ग के व्यक्ति को प्रत्याशी बनाकर चुनाव को रोमांचक बना सकती है। एसटी प्रत्याशी की संभावना को इससे बल मिलता है क्योंकि पार्टी ने आदिवासी चेहरा रहे सुमेर सिंह सोलंकी को दूसरा मौका नहीं दिया है। आमतौर पर ऐसा नहीं होता।

मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर असंतोष
बता दें, कांग्रेस के पास तीसरी सीट जिताने के लिए वोट यानी विधायक भले पर्याप्त हैं लेकिन कुछ कमजोर कड़ियों के चलते भाजपा दांव चल सकती है। भाजपा का एसटी प्रत्याशी होने पर कांग्रेस के आदिवासी विधायकों का समर्थन मिलने की संभावना बनेगी। इस बीच, मध्य प्रदेश कांग्रेस में पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को प्रत्याशी बनाए जाने पर असंतोष सामने आ रहा है। विधायकों के बीच भी मीनाक्षी नटराजन के नाम पर मतभेद हैं। इस बीच, प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यदि पार्टी तीसरी सीट पर प्रत्याशी घोषित करती है तो हम उसे जिताने की पूरी कोशिश करेंगे।

क्रॉस वोटिंग का डर
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा डर क्रॉस वोटिंग का है। पार्टी के 64 विधायक हैं। बीना से विधायक निर्मला सप्रे का झुकाव भाजपा की तरफ होने और विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर लगी रोक जैसी तकनीकी वजहों से कांग्रेस का प्रभावी आंकड़ा 62 पर सिमट गया है। तीसरी सीट को सुरक्षित रूप से जीतने के लिए 58 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है।

कांग्रेस के पास दावों के मुताबिक भले ही 62 विधायकों का गणित हो, लेकिन जमीनी स्तर पर पार्टी के पास केवल चार अतिरिक्त वोट ही बच रहे हैं। ऐसे में यदि सिर्फ 4-5 विधायक भी क्रॉस वोटिंग कर दें या फिर मतदान से अनुपस्थित हो जाएं तो खेल पलट जाएगा। भाजपा ऐसे असंतुष्ट विधायकों से संपर्क साध सकती है।

भाजपा नेता कांग्रेस विधायकों के संपर्क में
मध्य प्रदेश में आदिवासी और महिला मतदाता दोनों ही निर्णायक भूमिका में हैं। ऐसे में भाजपा विपक्ष को महिला या आदिवासी विरोधी साबित करने का नैरेटिव सेट कर सकती है। भाजपा ने प्रत्याशियों के पैनल में आदिवासी वर्ग की पूर्व मंत्री रंजना बघेल का नाम भी भेजा था। पार्टी सूत्र कहते हैं कि मीनाक्षी के विरुद्ध यदि ऐसा कोई प्रत्याशी भाजपा खड़ा करेगी तो कांग्रेस के आदिवासी विधायक भी समर्थन कर सकते हैं।

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