नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुई घटना से जुड़े मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छात्रा को माफ किए जाने के बाद प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है। छात्रा के अधिवक्ता अनिल सिंह ने एफआईआर में दर्ज तथ्यों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उसमें छात्रा की उम्र और पेशे से संबंधित जानकारी सही नहीं है।
वकील के अनुसार, छात्रा की उम्र 15 वर्ष है और वह राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा प्रणाली (ओपन स्कूल) से कक्षा 10वीं की पढ़ाई कर रही है। उन्होंने कहा कि एफआईआर में छात्रा को सैलून में कार्यरत बताया गया है, जबकि यह तथ्य गलत है। उनका आरोप है कि पुलिस ने पर्याप्त जांच के बिना मामला दर्ज किया।
अधिवक्ता ने बताया कि अब तक परिवार को पुलिस की ओर से कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है और न ही किसी अधिकारी ने संपर्क किया है। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार पर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया गया है। उनके अनुसार, शुक्रवार को छात्रा का जन्मदिन था और उसी दिन प्रधानमंत्री की ओर से मिला माफी का संदेश उसके लिए विशेष महत्व रखता है।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर जारी वीडियो संदेश में कहा था कि जंतर-मंतर की घटना के दौरान कुछ बच्चों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा अनुचित और अस्वीकार्य थी। उन्होंने कहा कि उनके तथा उनकी दिवंगत माता के संबंध में की गई टिप्पणियां दुखद थीं, लेकिन वह इस पूरे प्रकरण को कटुता की भावना से नहीं देखना चाहते।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि बचपन में गलतियां हो सकती हैं और बच्चों को उन्हें सुधारने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में दंड से अधिक आवश्यक है कि बच्चों को सही मार्गदर्शन दिया जाए, ताकि वे भविष्य में सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकें। उन्होंने युवाओं से अपनी गलतियों से सीख लेकर देश के विकास में रचनात्मक भूमिका निभाने की भी अपील की।
इससे पहले संबंधित छात्रा ने भी एक वीडियो संदेश जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी।




