अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर तेल और भू-राजनीतिक तनाव का दबाव, निवेशकों में बढ़ी चिंता

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वैश्विक बाजारों में सोमवार को तेल की बढ़ती कीमतों और मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें छह सप्ताह के उच्च स्तर के करीब पहुंच गई हैं।

100 डॉलर के करीब पहुंचा कच्चा तेल
ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। तेल की कीमतों में तेजी का प्रमुख कारण मध्य-पूर्व से आपूर्ति बाधित होने की आशंका और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ता तनाव है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नजर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां जहाजों की आवाजाही को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता पैदा कर दी है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया हमलों के बाद निवेशक इस क्षेत्र में किसी भी नए घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

महंगे तेल से बढ़ सकता है महंगाई का दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी का असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहता। परिवहन, विनिर्माण और अन्य क्षेत्रों की लागत बढ़ने से दुनिया भर में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती का फैसला भी मुश्किल हो सकता है।

शेयर बाजार भी दबाव में
तेल की तेजी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर शेयर बाजारों पर भी पड़ा। भारतीय बाजार में सोमवार को सेंसेक्स करीब 0.50 प्रतिशत और निफ्टी 0.50 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। निवेशकों की नजर अब तेल की कीमतों के साथ-साथ अमेरिका की महंगाई संबंधी आगामी आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के अगले कदम पर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ता है तथा तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगी।

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